Milgram प्रयोग: क्या आप भी ‘आदेश’ पर दे सकते हैं जानलेवा झटका?

Shivshakti Singh
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वह प्रयोग जिसने मानवीय आज्ञाकारिता का अंधेरा पहलू उजागर किया

1960 के दशक में स्टैनली मिलग्राम ने एक ऐसा प्रयोग किया जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया। नाज़ी यातना शिविरों के पीछे के मनोविज्ञान को समझने की कोशिश में, इस प्रयोग ने सामान्य लोगों की आज्ञापालन की सीमा का पता लगाया।

प्रयोग क्या था?

प्रतिभागियों को बताया गया कि वे एक ‘शिक्षक’ की भूमिका में हैं और ‘छात्र’ (जो वास्तव में एक अभिनेता थे) को गलत जवाब पर बिजली के झटके देना है। झटके का वोल्टेज हर गलती पर बढ़ता जाता, जिसके बाद ‘छात्र’ की कराह सुनाई देती। हैरानी की बात यह रही कि प्रयोगकर्ता के ‘जारी रखें’ के आदेश पर, 65% प्रतिभागियों ने 450 वोल्ट के घातक स्तर तक झटके दिए, भले ही वे तनाव से पसीना-पसीना हो रहे थे।

आज भी क्यों प्रासंगिक है?

मिलग्राम प्रयोग सिर्फ एक ऐतिहासिक घटना नहीं है। यह हमें आज भी सवाल करने पर मजबूर करता है: क्या हम भी अधिकार के सामने अपनी नैतिकता भूल सकते हैं? चाहे वह ऑफिस का बॉस हो, राजनीतिक नेता या सोशल मीडिया का दबाव, यह प्रयोग बताता है कि संदर्भ और दबाव हमारे फैसलों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं

विवाद और आलोचना

इस प्रयोग को नैतिक आधार पर कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी, क्योंकि प्रतिभागियों को गहरे मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा। कई आलोचकों का मानना है कि परिणामों की व्याख्या सीधे ‘आज्ञाकारिता’ के बजाय प्रयोग की विशिष्ट परिस्थितियों के तहत दबाव के रूप में की जानी चाहिए। फिर भी, यह मनोविज्ञान की दुनिया का एक लैंडमार्क बना हुआ है।

सवाल यह नहीं कि ‘वे’ ऐसा कैसे कर सकते थे। असल सवाल यह है कि क्या ‘हम’ ऐसा कर सकते हैं?

Tags: Milgram प्रयोग, मानवीय आज्ञाकारिता, स्टैनली मिलग्राम, मनोविज्ञान प्रयोग

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