एक युग का अंत: 91 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस
भारतीय पार्श्व गायन की अमर विरासत, पद्म विभूषण अशा भोसले का लंबी बीमारी के बाद आज मुंबई में निधन हो गया। उनके परिवार ने इस दुखद समाचार की पुष्टि की है। वह 91 वर्ष की थीं। उनके निधन से संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
अनगिनत हिट गानों और रिकॉर्ड्स की धनी विरासत
अशा जी ने अपने सात दशक लंबे करियर में 12,000 से अधिक गाने गाए और गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। उनकी आवाज़ ने ‘दम मारो दम’, ‘पिया तू अब तो आजा’, ‘ओ मेरे सोना रे’ जैसे गानों के जरिए कई पीढ़ियों का दिल जीता। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने भजन, पॉप, ग़ज़ल से लेकर पश्चिमी संगीत तक हर विधा को छुआ।
लता मंगेशकर के साथ रही प्रतिद्वंद्विता और अनूठी पहचान
बड़ी बहन लता मंगेशकर की छाया में शुरुआत करने वाली अशा ने अपनी एक अलग, ऊर्जावान और बोल्ड शैली से एक स्वतंत्र पहचान बनाई। उन्होंने आरडी बर्मन जैसे संगीतकारों के साथ मिलकर हिंदी फिल्म संगीत को एक नई दिशा दी। उनका ‘अशा-भोंसले’ रेस्तरां श्रृंखला भी उनके व्यवसायिक सफर का हिस्सा रहा।
संगीत प्रेमियों और उद्योग जगत से श्रद्धांजलि
उनके निधन की खबर मिलते ही सोशल मीडिया पर फैन्स और बॉलीवुड हस्तियों ने शोक और श्रद्धांजलि का सैलाब शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर उनके योगदान को याद किया। अशा भोसले का जाना सिर्फ एक गायिका का जाना नहीं, बल्कि भारतीय संगीत के एक जीवंत अध्याय का समापन है। उनकी आवाज़ हमेशा हमारे बीच उनके गानों के जरिए जीवित रहेगी।
Tags: अशा भोसले निधन, Asha Bhosle, भारतीय पार्श्व गायिका, बॉलीवुड संगीत
