बड़ी खबर: सेमीकंडक्टर उद्योग को मिला नया बूस्ट
केंद्रीय कैबिनेट ने भारत को सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को कैबिनेट ने कुल 3,936 करोड़ रुपये की लागत वाली दो नई सेमीकंडक्टर इकाइयों को मंजूरी दे दी। इस मंजूरी के साथ ही भारत सरकार की महत्वाकांक्षी ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (ISM) के तहत स्वीकृत कुल परियोजनाओं की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
कहां और क्या बनेगा?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ये दोनों नई इकाइयां देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित की जाएंगी। इनमें से एक इकाई विशेष रूप से ऑटोमोटिव, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक अनुप्रयोगों के लिए चिप्स का उत्पादन करेगी। दूसरी इकाई एडवांस्ड पैकेजिंग और असेंबली पर फोकस करेगी। यह कदम न सिर्फ आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोलेगा।
क्यों है यह फैसला अहम?
भारत फिलहाल सेमीकंडक्टर के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। कोविड के बाद आई चिप की वैश्विक कमी ने इस कमजोरी को उजागर कर दिया था। सरकार ने इसी कमी को दूर करने के लिए ISM की शुरुआत की थी, जिसमें 76,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रोत्साहन पैकेज शामिल है। अब तक स्वीकृत 12 परियोजनाओं में से कई पर काम शुरू हो चुका है। माना जा रहा है कि आने वाले 3-4 वर्षों में भारत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का एक अहम केंद्र बन सकता है।
आर्थिक और रणनीतिक लाभ
इस फैसले से न केवल इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को बल मिलेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी यह महत्वपूर्ण है। अपने स्वयं के चिप्स बनाने से डेटा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में 10% से अधिक हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिलेगी।
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