अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में तेल को वैश्विक प्रभुत्व का हथियार बनाया जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया है। तेल कंपनियों से चुनावी फंडिंग के बदले घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने वाली नीतियां लागू की गई हैं। पर्यावरणीय नियमों में ढील देकर ड्रिलिंग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
विदेश नीति में प्रतिद्वंद्वी देशों पर प्रतिबंध लगाकर और होर्मुज संकट जैसे भू-राजनीतिक तनाव पैदा करके अमेरिकी तेल की मांग बढ़ाई जा रही है। इसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ रहा है। भारत को अब सस्ते रूसी तेल के बजाय महंगा अमेरिकी तेल खरीदने के लिए मजबूर किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति वैश्विक ऊर्जा बाजार को पूरी तरह बदल देगी। ट्रंप का नारा ‘ड्रिल, बेबी, ड्रिल’ अब ‘ड्रिल, सैंक्शन, कंट्रोल’ में बदल गया है। आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।
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