जब बोरियत ने दुनिया को दिया एक नया खेल
आज का लोकप्रिय और स्टाइलिश खेल स्नूकर, अपनी शुरुआत में सिर्फ एक ‘बोरियत भगाने का तरीका’ था। यह कहानी है 1875 की, जब भारत में तैनात एक ब्रिटिश अफसर, सर नेविल चेम्बरलेन, ऊब गए थे। उन्होंने पारंपरिक ‘ब्लैक पूल’ नामक गेम में एक नया मोड़ दिया। इस नए वेरिएशन में उन्होंने रंगीन गेंदें जोड़ीं और नियम बदले। यही नया खेल आगे चलकर ‘स्नूकर’ कहलाया।
इतिहास में दर्ज हुआ एक पत्र
दिलचस्प बात यह है कि चेम्बरलेन के इस योगदान को आधिकारिक मान्यता बहुत बाद में मिली। 1938 में, उन्होंने ‘द फील्ड’ पत्रिका को एक पत्र लिखा और इस खेल के आविष्कार का श्रेय लिया। 1939 में लेखक कॉम्पटन मैकेंजी ने भी इस दावे का समर्थन किया। इस तरह, इतिहास में एक औपनिवेशिक शगल के रूप में जन्मा यह खेल, अपने असली जनक के नाम से जुड़ गया।
शगल से वैश्विक खेल तक का सफर
स्नूकर ने भारत में शुरुआत करने के बाद इंग्लैंड में लोकप्रियता पकड़ी। समय के साथ इसके नियम और संरचना मजबूत हुई। 20वीं सदी में टेलीविजन के प्रसार ने इसे लोगों के बीच पहुंचाया और इसे एक पेशेवर खेल का दर्जा दिलाया। आज, रोनी ओ’सुल्लिवन जैसे आधुनिक चैंपियनों ने इसे नई पहचान दी है। यह खेल अब एशिया और यूरोप में समान रूप से पसंद किया जाता है और एक वास्तविक वैश्विक खेल बन चुका है।
तो अगली बार जब आप स्नूकर मैच देखें, तो याद रखें कि इसकी जड़ें भारतीय धरती में हैं, और इसकी शुरुआत एक बोर अफसर की रचनात्मकता से हुई थी!
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