FSSAI ने बेसन, समुद्री भोजन और सीड ऑयल के लिए सख्त किए सुरक्षा मानक
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अब बेसन, समुद्री भोजन (सीफूड) और सीड ऑयल (बीजों से बने तेल) के लिए सुरक्षा नियमों को और सख्त कर दिया गया है। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को मिलावट और दूषित खाद्य पदार्थों से बचाना है।
बेसन में मिलावट पर लगाम
बेसन, जो भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है, अक्सर मिलावट का शिकार होता है। FSSAI ने अब बेसन में आर्टिफिशियल कलर, केमिकल और अन्य हानिकारक पदार्थों की मिलावट को रोकने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्माताओं को अब बेसन की शुद्धता और गुणवत्ता की जांच के लिए नियमित परीक्षण कराना अनिवार्य होगा।
समुद्री भोजन में फॉर्मेलिन और हेवी मेटल पर नजर
समुद्री भोजन, खासकर मछली और झींगा, में फॉर्मेलिन और हेवी मेटल (जैसे मरकरी) की मौजूदगी एक गंभीर चिंता का विषय रही है। नए नियमों के तहत, सीफूड उत्पादों में फॉर्मेलिन की मात्रा शून्य होनी चाहिए। साथ ही, हेवी मेटल की सीमा तय कर दी गई है। आयातित और घरेलू दोनों तरह के समुद्री भोजन की अब कड़ी जांच होगी।
सीड ऑयल में मिलावट पर पाबंदी
सीड ऑयल (जैसे सरसों, सोयाबीन, सूरजमुखी तेल) में अक्सर सस्ते और हानिकारक तेलों की मिलावट पाई जाती है। FSSAI ने अब सीड ऑयल में मिलावट के लिए जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है। तेल निर्माताओं को अपने उत्पादों की शुद्धता प्रमाणित करनी होगी और हर बैच की जांच रिपोर्ट रखनी होगी।
उपभोक्ताओं को होगा फायदा
इन सख्त नियमों से उपभोक्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। अब बाजार में मिलने वाला बेसन, मछली और खाने का तेल अधिक सुरक्षित होगा। FSSAI ने राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को भी इन नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
यह कदम ‘स्वस्थ भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे हमेशा FSSAI-अनुमोदित उत्पाद ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध मिलावट की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।
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