कावेरी विवाद: कर्नाटक-तमिलनाडु के बीच फंसी कांग्रेस, मेकेदातु बांध ने बढ़ाई मुश्किलें

Shivshakti Singh
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कर्नाटक का मेकेदातु बांध प्रोजेक्ट, तमिलनाडु में हड़कंप

कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना ने एक बार फिर कावेरी जल विवाद को हवा दे दी है। तमिलनाडु इस प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध कर रहा है, जिससे दोनों राज्यों के बीच तनाव चरम पर है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही राज्यों में अब कांग्रेस पार्टी की सरकार है, लेकिन यह विवाद पार्टी के लिए सिरदर्द बन गया है।

कांग्रेस के लिए डबल चुनौती

एक तरफ कर्नाटक में कांग्रेस सरकार मेकेदातु बांध को अपनी प्राथमिकता बता रही है, वहीं तमिलनाडु में कांग्रेस सहयोगी दलों के साथ मिलकर इसका विरोध कर रही है। यह स्थिति पार्टी के लिए एक बड़ी राजनीतिक पहेली बन गई है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने साफ कहा है कि वे इस प्रोजेक्ट को किसी भी कीमत पर नहीं छोड़ेंगे, जबकि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इसे ‘राष्ट्रीय हित के खिलाफ’ बताया है।

क्यों बढ़ रहा है तनाव?

मेकेदातु बांध परियोजना का उद्देश्य कर्नाटक में पीने के पानी और बिजली उत्पादन की जरूरतों को पूरा करना है। लेकिन तमिलनाडु का आरोप है कि इससे कावेरी नदी के पानी का बहाव कम हो जाएगा, जिससे उसके किसानों को भारी नुकसान होगा। यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है, और दोनों राज्यों के बीच बातचीत भी बेअसर साबित हुई है।

कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं

यह विवाद कांग्रेस के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है। पार्टी को दोनों राज्यों की सरकारों को संतुलित करना है, लेकिन हर फैसला उसे एक राज्य में नुकसान पहुंचा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह मामला लंबा खिंचा, तो कांग्रेस को 2024 के लोकसभा चुनावों में दोनों राज्यों में कीमत चुकानी पड़ सकती है। फिलहाल, कावेरी का पानी कांग्रेस के लिए राजनीतिक जंगल का रास्ता दिखा रहा है।

Tags: कावेरी विवाद, मेकेदातु बांध, कर्नाटक तमिलनाडु जल विवाद, कांग्रेस राजनीतिक संकट

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