टूटते तिनके: ममता की सेना में सेंध, 58 विधायक बागी
पश्चिम बंगाल की सियासत में एक नया भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के ठीक एक महीने बाद, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया है। पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने खुलेआम बगावत कर दी है और निष्कासित नेता ऋतबरत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया है।
यह विद्रोह ममता बनर्जी के नेतृत्व पर सीधा सवाल है। ऋतबरत बनर्जी, जिन्हें पहले पार्टी से निकाला जा चुका है, अब विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। यह स्थिति साफ करती है कि पार्टी के अंदर ममता की पकड़ कमजोर होती जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक शुरुआत है। अगर ममता बनर्जी ने जल्द ही इस बगावत पर काबू नहीं पाया, तो तृणमूल कांग्रेस दो फाड़ हो सकती है। ऋतबरत बनर्जी के समर्थकों का कहना है कि पार्टी में लोकतंत्र खत्म हो गया है और फैसले सिर्फ एक व्यक्ति के इशारे पर होते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यह विद्रोह उस समय हुआ है जब ममता बनर्जी राष्ट्रीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं। विपक्षी एकता के मंच पर वह एक अहम चेहरा हैं, लेकिन अपने ही घर में यह बगावत उनके लिए बड़ा झटका है। अब देखना यह है कि ममता इस चुनौती से कैसे निपटती हैं और क्या वह अपनी खोई हुई पकड़ वापस पा पाती हैं।
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