पिता के एक्सीडेंट के बाद संघर्ष से सिनेमा तक: रंजना आंजन का कमाल का सफर

Shivshakti Singh
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थिएटर से कैनन तक का सफर

करीब 15 साल थिएटर में बिताने के बाद रंजना आंजन ने आखिरकार सिल्वर स्क्रीन पर कदम रखा है। उनकी फिल्म ‘चांद तारा’ का ट्रेलर प्रतिष्ठित कान फिल्म फेस्टिवल में दिखाया जा चुका है। इस खास बातचीत में रंजना ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की।

पिता के हादसे ने बदल दी जिंदगी

रंजना ने बताया, ‘पिता के एक्सीडेंट के बाद हमारा गुजरना मुश्किल हो गया था।’ मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाली रंजना ने आर्थिक तंगी का सामना किया, लेकिन पिता के अटूट सहयोग ने उन्हें हिम्मत दी। उन्होंने कहा कि थिएटर ने उन्हें जीना सिखाया और अब सिनेमा उनके सपनों को नई उड़ान दे रहा है।

बड़े आइकॉन से सीखे सबक

रंजना ने अपने जीवन के अनुभवों और दिग्गज कलाकारों से मिली सीख को भी साझा किया। उनका मानना है कि संघर्ष ही इंसान को मजबूत बनाता है। ‘चांद तारा’ उनकी पहली फिल्म है, लेकिन इसकी कान स्क्रीनिंग ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिला दी है।

Tags: रंजना आंजन, चांद तारा, कान फिल्म फेस्टिवल, थिएटर से सिनेमा

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