एमडीयू की प्रोफेसर को मिला 25 लाख का अनुदान, अब सूखे में भी लहलहाएगी गेहूं की फसल

Shivshakti Singh
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गेहूं की खेती में क्रांति: एमडीयू प्रोफेसर को 25 लाख का अनुदान

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) की प्रोफेसर विनीता हूडा को गेहूं की टिकाऊ खेती के लिए एक बड़ी उपलब्धि मिली है। हरियाणा राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (HSCST) ने उनके तीन वर्षीय शोध प्रोजेक्ट के लिए 25 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया है।

इस शोध का उद्देश्य गेहूं की खेती में उर्वरकों के उपयोग को नाटकीय रूप से कम करना है। प्रो. हूडा माइकोराइजा और माइक्रोबायोम के बीच तालमेल (सिनर्जी) का अध्ययन कर रही हैं, जो मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाकर फसल को गर्मी और सूखे जैसी चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनाएगा।

इस तकनीक के सफल होने पर किसानों को रासायनिक उर्वरकों पर खर्च कम करना होगा, जिससे उनकी लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा। साथ ही, मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी लंबे समय तक बनी रहेगी। यह परियोजना एमडीयू के नवाचार और कृषि क्षेत्र में योगदान को एक नई पहचान देगी।

प्रो. हूडा का कहना है कि यह शोध टिकाऊ खेती की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पर्यावरण और किसानों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।

Tags: MDU research grant, sustainable wheat farming, Prof. Vinita Hooda, HSCST funding

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