चीन की एंटी-एजिंग लालसा गधों को विलुप्ति के कगार पर ला रही है

Shivshakti Singh
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चीन की एंटी-एजिंग लालसा गधों को विलुप्ति के कगार पर ला रही है

चीन में बढ़ती एंटी-एजिंग क्रीम और पारंपरिक दवाओं की मांग गधों की आबादी के लिए संकट बन गई है। गधों की खाल से बने ‘एजियाओ’ नामक जिलेटिन का उपयोग त्वचा को जवां और स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है। इसकी बढ़ती मांग के कारण दुनिया भर में गधों की अवैध तस्करी और अंधाधुंध वध हो रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले एक दशक में वैश्विक गधों की आबादी में 50% से अधिक की गिरावट आई है। चीन में ही हर साल लाखों गधों की खाल का उपयोग होता है, जिससे यह प्रजाति विलुप्ति के कगार पर पहुंच गई है। अफ्रीका और एशिया के कई देशों में गधों की तस्करी एक गंभीर समस्या बन गई है।

यह स्थिति न केवल जैव विविधता के लिए खतरा है, बल्कि उन समुदायों के लिए भी संकट पैदा कर रही है जो गधों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं। गधों की कमी से किसानों को खेतों में ढुलाई और परिवहन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

विश्व वन्यजीव कोष (WWF) और अन्य संगठनों ने चीन से इस प्रथा पर नियंत्रण लगाने और गधों के संरक्षण के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है। लेकिन जब तक एंटी-एजिंग उत्पादों की मांग कम नहीं होती, यह संकट बना रहेगा।

Tags: चीन एंटी-एजिंग, गधा विलुप्ति, एजियाओ, गधा तस्करी

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