बदलते वक्त का संकेत: ह्यूस्टन विश्वविद्यालय ने धार्मिक अध्ययन डिग्री को किया खत्म
अमेरिका में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लिबरल आर्ट्स (उदार कला) पाठ्यक्रमों में लगातार गिरती दाखिला संख्या के बीच, यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन सिस्टम ने अपने अंडरग्रेजुएट धार्मिक अध्ययन (Religious Studies) डिग्री प्रोग्राम को बंद करने का फैसला किया है। बोर्ड ऑफ रीजेंट्स ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
हालांकि, यह बदलाव तुरंत नहीं होगा। यह प्रोग्राम औपचारिक रूप से साल 2032 में बंद होगा। इस दौरान मौजूदा छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। सबसे अहम बात यह है कि विश्वविद्यालय में धार्मिक अध्ययन में माइनर (सहायक विषय) जारी रहेगा, जिससे छात्र इस विषय तक पहुंच बना सकेंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह फैसला अमेरिकी विश्वविद्यालयों में लिबरल आर्ट्स प्रोग्राम्स के प्रति बदलते रुझान को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में, छात्रों का रुझान STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) और पेशेवर कोर्सेज की ओर बढ़ा है, जिससे दर्शनशास्त्र, इतिहास और धार्मिक अध्ययन जैसे पारंपरिक विषयों में नामांकन लगातार कम हो रहा है। ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में धार्मिक अध्ययन में छात्रों की संख्या बहुत कम रह गई थी, जिसके चलते इसे जारी रखना आर्थिक रूप से संभव नहीं था।
यह कदम सिर्फ एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे अमेरिका में लिबरल आर्ट्स शिक्षा के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों का एक उदाहरण है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रवृत्ति आने वाले समय में और तेज हो सकती है।
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