लगातार तीसरी बार बढ़े ईंधन के दाम
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर इजाफा हुआ है। पिछले 10 दिनों में यह तीसरा मौका है जब ईंधन के दाम बढ़े हैं। इस बढ़ोतरी ने आम आदमी की जेब पर और बोझ डाल दिया है।
सरकारी तेल कंपनियों को भारी घाटा
सूत्रों के अनुसार, सरकारी तेल कंपनियां (PSUs) पेट्रोल पर 13 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 38 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं। यह घाटा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू स्तर पर कीमतों को नियंत्रित रखने के कारण हो रहा है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये के कमजोर होने से आयात महंगा हो गया है। सरकारी कंपनियां लगातार घाटा उठा रही हैं, जिससे उन्हें कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
आम जनता पर असर
ईंधन की बढ़ती कीमतों का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ जाता है, जिससे सब्जियों से लेकर दूध तक सब कुछ महंगा हो जाता है। आने वाले दिनों में और बढ़ोतरी की आशंका से लोग चिंतित हैं।
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