अमेरिका में डेटा इंजीनियरिंग की नौकरी? टेक फाउंडर ने बताई सच्चाई: $100K H-1B फीस ने बदल दी तस्वीर

Shivshakti Singh
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भारतीय छात्रों का सवाल, टेक फाउंडर का चौंकाने वाला जवाब

अमेरिका में डेटा इंजीनियरिंग की नौकरी पाने का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ा झटका सामने आया है। एक टेक फाउंडर ने खुलासा किया कि H-1B वीज़ा के लिए $100,000 (करीब 83 लाख रुपये) की फीस ने इस सपने को काफी मुश्किल बना दिया है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में एक भारतीय छात्र ने सोशल मीडिया पर पूछा, ‘मैं अमेरिका में डेटा इंजीनियरिंग की नौकरी कैसे पाऊं?’ इस सवाल का जवाब देते हुए एक जाने-माने टेक फाउंडर ने कहा कि जवाब काफी निराशाजनक है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी कंपनियों को H-1B वीज़ा के लिए भारी फीस चुकानी पड़ती है, जिससे वे भारतीय छात्रों को काम पर रखने से कतराती हैं।

$100K फीस का असर

टेक फाउंडर के अनुसार, H-1B वीज़ा प्रक्रिया में कानूनी फीस, प्रशिक्षण लागत और अन्य खर्च मिलाकर कंपनी को लगभग $100,000 तक का खर्च आता है। यह राशि छोटी और मझोली कंपनियों के लिए बहुत बड़ी है। इसलिए वे स्थानीय अमेरिकी या ग्रीन कार्ड धारकों को प्राथमिकता देती हैं।

भारतीय छात्रों के लिए चुनौती

यह स्थिति भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती है। अमेरिका में डेटा इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भारतीय प्रतिभा की भारी मांग है, लेकिन वीज़ा की बाधा उनके रास्ते में रोड़ा बन रही है। कई छात्रों को अपने सपनों को छोड़ना पड़ रहा है या फिर कनाडा, यूके जैसे दूसरे देशों का रुख करना पड़ रहा है।

क्या है समाधान?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय छात्रों को अमेरिका के अलावा अन्य देशों में भी अवसर तलाशने चाहिए। साथ ही, अमेरिकी सरकार को वीज़ा फीस में कमी करनी चाहिए ताकि प्रतिभा का पलायन रुक सके। फिलहाल, यह स्थिति भारतीय छात्रों के लिए एक कड़वी सच्चाई है।

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