हवाई यात्रा पर संकट: 2026 तक सिर्फ 0.8% ईंधन होगा सस्टेनेबल, IATA की चेतावनी
वैश्विक विमानन उद्योग के लिए नेट-ज़ीरो का लक्ष्य अब एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का उत्पादन बेहद कम है और 2026 तक यह कुल विमानन ईंधन खपत का मात्र 0.8% ही पूरा कर पाएगा।
यह आंकड़ा उद्योग के लिए एक चेतावनी है, क्योंकि इस समय एयरलाइंस को SAF पर 4.3 बिलियन डॉलर का भारी बिल चुकाना पड़ रहा है। IATA का कहना है कि नीतिगत समर्थन की कमी के कारण SAF की उपलब्धता और कीमत दोनों ही चिंता का विषय बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक SAF (e-SAF) जैसे अवास्तविक मानदंडों पर जोर देने से कीमतों में और वृद्धि हो सकती है। इससे संसाधन वास्तविक उत्सर्जन कटौती से हटकर महंगे विकल्पों पर केंद्रित हो जाएंगे, जिससे पर्यावरणीय लक्ष्यों को झटका लग सकता है।
IATA ने सरकारों से अपील की है कि वे SAF उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीतियां बनाएं और सब्सिडी प्रदान करें, ताकि यह तकनीक किफायती और सुलभ हो सके। फिलहाल, हवाई यात्रा का भविष्य हरित ईंधन की इसी चुनौती पर टिका हुआ है।
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